Lalit Kaira

Freshman - 593 Points (13/04/1985 / Binta, India)

रानीखेत - Poem by Lalit Kaira

हरे मखमली रास्तों पर गुजरे
वो बेपरवाह लम्हें-
गाते, गुनगुनाते
भीगे-महकते
और तुम्हारा साथ।
ये पेड़ ये पहाड़
महकती बयार
हँसी -ठट्ठा-पढाई-प्यार

पता है रानीखेत क्या है
मेरे लिए मेरे किसी पुराने सिल्क के कुर्ते
की सलवट में दबी
किसी चूंड़ी के टुकड़े की तरह है-
रानीखेत।

Topic(s) of this poem: places

Form: Free Verse


Comments about रानीखेत by Lalit Kaira

  • Rajnish Manga (11/2/2015 9:29:00 AM)


    प्रकृति की दृश्यावली में अनुपम कल्पनाशीलता का सुखद प्रयोग. इसमें शीतल बयार की ताज़गी है. धन्यवाद, मित्र. (Report) Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Monday, November 2, 2015



[Report Error]