Upendra Singh 'suman'

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दीवाली - Poem by Upendra Singh 'suman'

दीवाले संग गठबंधन कर आई है इस बार दीवाली.
लील गई दीया और बाती तन की उजली मन कि काली.

कैसे दे दूँ उसके आने पर तुमको मैं बन्धु बधाई.
अँधियारे संग लिप्त गई जो रास रचाती हरजाई.
घोर दुपहरी कमर हिलाती छम-छम रजनी काली.
दिवाले संग गठबंधन कर आई है...........

Topic(s) of this poem: festival of light

Form: ABC


Comments about दीवाली by Upendra Singh 'suman'

  • Rajnish Manga (11/20/2015 11:57:00 AM)


    इस गीत में नयापन है. अभिव्यक्ति की मधुरता मन को बाँध लेती है. दीपावली में मन की टीस छुप नहीं पाती. धन्यवाद, मित्र. (Report) Reply

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Poem Submitted: Friday, November 20, 2015

Poem Edited: Thursday, December 3, 2015


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