Upendra Singh 'suman'

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गठबंधन का मन्त्र - Poem by Upendra Singh 'suman'

अकड़ न ज्यादा दिखा न नखड़े बन जा अब दुमछल्ले.
धीरे-धीरे कल्ले -कल्ले हो जाएगी बल्ले-बल्ले
गर्ल फ्रेंड को गुडबॉय कह, भूल जा यारा यारी.
साले-साली की सेवा की कर तू अब तैयारी.
खुद की समझ विसर्जित कर अब उनसे बुद्धि-अकल ले.
अकड़ न ज्यादा...............................

भूल जा यारा धमाचौकड़ी, डेटिंग-वेटिंग, धींगामस्ती.
सच्चे मन से चरण धूलि ले कर ले भइये उनकी भक्ति.
हुक्म है जितना घरवाली का बस उतना ही चल ले.
अकड़ न ज्यादा...........................................

माना की तू पुरूष है प्यारे पर नारी क्या कम है.
उसमें भी तो झांसी की रानी जैसा दमखम है,
नहीं मोर्चा लेने का बस थोड़ा बहुत उछल ले.
अकड़ न ज्यादा....................................

सहनशीलता का पुतला बन कानों को कर बहरा,
आंखों को भी समझा दे है उन पर अब पहरा,
फिर भी गर कुछ हो गड़बड़ तो पतली गली निकल ले.
अकड़ न ज्यादा........................................

चलनी है सरकार उन्हीं की किये जा उनकी जयजयकार.
गठबंधन का मंत्र यही है कहती है भारत सरकार.
हर इक गलत-सही पर उसकी थोड़ा-बहुत मचल ले.
अकड़ न ज्यादा...........................................

उपेन्द्र सिंह 'सुमन'

Topic(s) of this poem: life


Comments about गठबंधन का मन्त्र by Upendra Singh 'suman'

  • (12/16/2015 2:21:00 PM)


    वाह! वाह! क्या बात है. हास्य -व्यंग्य की एक खूबसूरत, प्रभवी और मनोहारी रचना - डा. आर. सिंह (Report) Reply

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  • (12/5/2015 6:17:00 AM)


    bahut khooob! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! (Report) Reply

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Poem Submitted: Tuesday, December 1, 2015



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