Sandesh Lives


पागक-मान - Poem by Sandesh Lives

पागक-मान
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उत्तर हिमालय पूरव कोसी कमला बलान अछि
पश्चिम बहथि गण्डकी दक्षीण गंगा निशान अछि
थिकहुँ हमसभ मैथिल हमर मिथिलामे गाम अछि
आन-वान-शान हमर 'पाग' स्वाभिमान अछि ॥

मैथिलीक मिट्ठ भाषा हमर मिसरी समान अछि
विद्याधनसँ विभूषित हमर आंगन दलान अछि
मिथिलाक वासी सभकियो मैथिल सन्तान अछि
आन-वान-शान हमर 'पाग' स्वाभिमान अछि ॥

मिथिलाक माँटिसँ हमर रग-रग जुआन अछि
जुआन-बुढ़-बच्चा हमरा सभपर गुमान अछि
जाति-रंग ने भेद-भाव सबहक सम्मान अछि
आन-वान-शान हमर 'पाग' स्वाभिमान अछि ॥

तिरहुत तिरभूक्ति मोक्ष-मुक्तिक वरदान अछि
बौद्धिक आध्यात्मिक चौतरफा गुणगान अछि
भौतिक समृद्धिक खातिर सामूहिक ध्यान अछि
आन-वान-शान हमर 'पाग' स्वाभिमान अछि ।।

Topic(s) of this poem: culture


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Poem Submitted: Monday, January 11, 2016



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