वेदना | Poem by akash tripathi11jan96

वेदना |

किसके विरुद्ध चढ़ाउ प्रत्यंचा
हर पक्ष लांछन की आशंका
शौर्य या विजय
किसकी करू आकांछा
इस छोर क़र्ज़ उस और धर्म
इस छोर मित्र उस और अनुज
इस छोर तात उस और कृष्ण
परन्तु
इस और विनाश उस और भी
रथ तैयार हुआ रणभूमि भी
लो तैयार हुआ मई भी
एक युद्ध
धर्म के विरुद्ध
श्री कृष्ण के विरुद्ध
शौर्य प्राप्त कर सका
विजय तो उनके पास थी
जो कृष्ण उनके पास थे
सूर्यपुत्र का ये तेज़
निश्तेज हो गया है आज
हर रण जीत ले गया
एक नियति से हार कर |

Friday, February 19, 2016
Topic(s) of this poem: introspection
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