दुविधा Poem by akash tripathi11jan96

दुविधा

एक अंतर्द्वंद्व छिड़ा हुआ है|
इस ह्रदय और मस्तिष्क में ||
एक क्षड़ीक बोल थम जाता है|
एक दूर पथ दर्शाता है ॥
किस ओर झुकु |
इस अर्ध- विजय के बाद||
एक विश्राम सुझाता है |
दूजा दो डग और चलता है||
कोई युक्ति सुझा दो मुझको|
इनमे से चुनु मैं किसको ||
एक सुख दे जाता है |
दूजा धैर्य सिखाता है ॥
सोचा वक़्त से पूछ लूंगा|
पर वक़्त कब ठहरा||
लो दौड़ लगा ली वक़्त से|
सायद पूछ पाउ ये प्रश्न मै|
अगर जीत पाया तो ||

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