मैं तो एक ख़्वाब हूँ जो आँख खुलते ही टूट जायेगा
भला नींद में ही हूँ की ग़म की याद नहीं है
आँख खुलते ही साथ मेरा ज़िन्दगी से छूट जायेगा
मैं तो एक ख़्वाब हूँ......
है मेरी ज़िन्दगी आईने की तरह
मेरे साथ से चेहरे लोगों के खिलते हैं
कभी भी नहीं भूलते मुझे ये लोग
आकर कहीं से भी पहले मुझसे ही मिलते हैं
मगर ना जनता था मैं कि फर्श पर गिरकर जिस्म मेरा फूट जायेगा
आँख खुलते ही साथ मेरा ज़िन्दगी से छूट जायगा
ना सोचा था कि ज़िन्दगी बदल जायेगी चंद टुकड़ों में
लोग मुझको नफ़रत से देखने लगेंगे
है मेरी क़द्र जो वो तो रहेगी ना
बल्कि लोग मुझे कूड़े में फेकने लगेंगे
कभी साथ करते थे जो मेरा आज रिश्ता मुझसे उनका टूट जायेगा
आँख खुलते ही साथ मेरा ज़िन्दगी से छूट जायेगा।
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