कोई रोता है महलों में भी Poem by Ahatisham Alam

कोई रोता है महलों में भी

Rating: 4.0

खुद में डूबा है इंसान क्यों इतना यहाँ
सिर्फ दौलत ही है उनका जहाँ
दर्द होता है सीनों में भी
इन अमीरों को इसकी क्या हो ख़बर
कोई रोता है तन्हा महलों में भी
इन अमीरों को इसकी क्या है ख़बर
अब जायें तो जायें कहाँ
सिर्फ दौलत ही है उनका जहाँ

Saturday, April 9, 2016
Topic(s) of this poem: life
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