ये आलम कभी रोता नहीं Poem by Ahatisham Alam

ये आलम कभी रोता नहीं

Rating: 5.0

कितनी तड़प आज भी सीने में दबा रखी है
कितनी घुटन इस मुस्कराहट के पीछे छुपा रखी है
एक तुम हो जो सबकुछ जानकर भी खामोश हो
एक हम हैं कि मिट जाने की कसम खा रखी है
आंसू हर वक्त होते हैं इन पलकों में
फिर भी ये आलम किसी के सामने कभी रोता नही
सूख जाये जो पौधा अपनी ज़मीं से
बारिश की बूंदों से भी वो हरा कभी होता नहीं।

Saturday, May 21, 2016
Topic(s) of this poem: love
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