बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने Poem by Ahatisham Alam

बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने

बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने
हर फूल को पलकों से लगाया मैंने
वो वक्त भी याद है जब सब अपने बेगाने थे
उन बेगानों को भी आज अपना पाया मैंने
फिर इन आँखों का कोई ख़्वाब उजड़ ना जाये
फिर रिश्तों का कोई मोती बिखर ना जाये
अपना गुज़रा हुआ हर दर्द भुला दिया
नफरतों का मोहब्बत से सिला दिया
हर कड़ुवाहट भूल कर सबको अपना बनाया मैंने
बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने

Sunday, June 12, 2016
Topic(s) of this poem: life
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