बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने
हर फूल को पलकों से लगाया मैंने
वो वक्त भी याद है जब सब अपने बेगाने थे
उन बेगानों को भी आज अपना पाया मैंने
फिर इन आँखों का कोई ख़्वाब उजड़ ना जाये
फिर रिश्तों का कोई मोती बिखर ना जाये
अपना गुज़रा हुआ हर दर्द भुला दिया
नफरतों का मोहब्बत से सिला दिया
हर कड़ुवाहट भूल कर सबको अपना बनाया मैंने
बड़ी हसरत से ये गुलशन है सजाया मैंने
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