रात जब अँधेरी हो तो Poem by Ahatisham Alam

रात जब अँधेरी हो तो

रात जब अँधेरी हो तो सुबह की रौशनी करीब होती है
किसी को सिर्फ दर्द मिलता है तो किसी को ख़ुशी नसीब होती है
कोई मरता है ख्वाबों पर तो किसी को ज़िन्दगी मिल जाती है
किसी को कुछ नही मिलता किसी को किसी और की ख़ुशी मिल जाती है
इस दिल का फ़साना क्या सुनाना
अपनी तो हर बात ही अजीब होती है
रात जब अँधेरी हो तो सुबह की रौशनी करीब होती है।

Thursday, November 17, 2016
Topic(s) of this poem: love
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