दर्द जितना भी हो आके रुलाये Poem by Ahatisham Alam

दर्द जितना भी हो आके रुलाये

Rating: 5.0

दर्द जितना भी हो आके रुलाये मुझको
क्यों कहूँ कोई सीने से लगाये मुझको

ये सच है कि मैं आईने की तरह बिखर जाता हूँ
टूट कर हर टुकड़ा एक नया आइना नज़र आता हूँ

एक दर्द से मुमकिन है हर दर्द का ख़ात्मा लेकिन
मुन्तज़िर हूँ कि वो आ के मनाये मुझको

Sunday, August 14, 2016
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 14 August 2016

बहुत खूब. आपके लेखन में नवीनता है और सुंदर भाव हैं. मुझे अच्छा लगा. धन्यवाद, ऐहतेशाम जी.

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