जिसने कभी मेरा होना ही ना चाहा Poem by Ahatisham Alam

जिसने कभी मेरा होना ही ना चाहा

Rating: 5.0

जिसने कभी मेरा होना ही ना चाहा
नादान दिल को वो ही मेरा लगता है
लाखों सूरज रौशन हैं मेरी सियाह रात में
महज़ एक चराग़ के ग़ुल होने से अँधेरा लगता है

Sunday, August 14, 2016
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 14 August 2016

बहुत खूब कहा आपने. मुझे आश्चर्य हो रहा है कि आपकी कविता अब तक कहाँ छुपी थी. खैर मिलते रहेंगे. धन्यवाद. जिसने कभी मेरा होना ही ना चाहा नादान दिल को वो ही मेरा लगता है

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