ठुकरा ही दिया तुमने Poem by Ahatisham Alam

ठुकरा ही दिया तुमने

टूट कर बिखर भी जाऊँ तो क्यूँ बताऊँ पत्थर के सनम को
ठुकरा ही दिया तुमने जब अपने उसूलों पे हमको
जो मेरा है जब वो तेरा रास्ता नहीं
मैं अब जियूँ या मरूँ तुमसे वास्ता नहीं
खुश रहो तुम अब छोड़कर इस आलम को
ठुकरा ही दिया तुमने जब अपने उसूलों पे हमको ।

Sunday, August 14, 2016
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success