शबो रोज़ करते हैं जो हिफाज़त सरहदों की Poem by Ahatisham Alam

शबो रोज़ करते हैं जो हिफाज़त सरहदों की

शबो रोज़ करते हैं जो हिफाज़त सरहदों की
मैं उन मुहाफिजों की ग़ुलामी लिखूँगा
जो सबकुछ लुटा दें हिन्दोस्तां पे
मैं उन फौजियों को सलामी लिखूँगा
कि दुश्मन के आगे कभी सर ना झुकेगा
इस आलम का अब ये कलम न रुकेगा
मोहब्बत है जिनको मेरे वतन से
मैं अब उनकी निगहबानी लिखूँगा
हुई हैं जो क़ुर्बान मेरे मुल्क पर
मैं वो सारी जवानी लिखूंगा

Sunday, August 14, 2016
Topic(s) of this poem: patriotic
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