तपिश उजालों की Poem by Ahatisham Alam

तपिश उजालों की

चुप रह के भी न कह पाये
कुछ कह के भी ना कह पाये
क्या खलिश सवालों में है
क्या दर्द ख्यालों में है
ये किस्मत है मेरी की
तुम होके भी नहीँ मेरे
जब मोम बना है दिल
तो तपिश उजालों में है।

Saturday, October 1, 2016
Topic(s) of this poem: love
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