आज उसे सोते देखा Poem by Kezia Kezia

आज उसे सोते देखा

आज उसे सोते देखा

जिसे हमेशा से पाँवों पे चलते देखता था

जिसे हर सुबह बस के पीछे दौड़ते देखता था

जिसे हर शाम महँगाई से हाथापाई करते देखता था

हर रविवार को बच्चों के दिन सवांरते देखता था

हर त्योहार को गरीबी से तकरार करते देखता था

जिसकी रफ्तार पर घड़ी की सुईयाँ मिलाया करता था

घिसी चप्पलों को रगड़ते देखता था

फटी साड़ी मे तन को समेटते देखता था

रोने को आँसू भी उधार माँगते देखता था

आज उसे रानी बनकर

फूलो से सजी पालकी पे

चार कांधो की सवारी करते देखा

जिसे कभी बैठे नहीं देखा था

आज उसे सोते देखा

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Friday, March 31, 2017
Topic(s) of this poem: death
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