कुछ शब्दों का भावनात्मक प्रवाह है
समस्त भावों का एकात्मक संचार है
कविता इस तंत्र का सार्वभौमिक सार है
प्रण प्रक्षेपण का आधार है
जीवन संचरण का विस्तार है
बूंदो के समागम का उपचार है
कविता मे निहित निर्वहन का सार है
कुछ कहना या सुनना मात्र नही
अनुशीलन का इसमें व्यवहार है
दुर्लभ संयोगों की भरमार है
समंवय से जुड़ी वेदना का विचार है
कविता इस तंत्र का समायोजित आचार है
विषय लिप्त आराधना का मूलाधर है
परमेश्वर की अनदेखी प्रतिमा का प्रतिष्ठान है
हरि चरण वंदना का विस्तृत संवाद है
कविता इस तंत्र का दुर्लभ अनुराग है
शील जनित रस का श्रिंगार है
शून्य मे प्रवाहित उल्लास का एकाग्रित उद्गार है
क्षणिक त्रुटियों का स्वभाविक अहंकार है
मानवीय गुणों के तप्त वैभव का प्रचार प्रसार है
कुछ भावों का भावनात्मक प्रवाह है
कविता इस तंत्र का सार्वभौमिक सार है
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