तुझसे बेहतर ना दौलत है
तुझसे बेहतर ना शोहरत है
तू निर्मल छोटा सा मोती है
इन आँखों की ज्योति है
आँचल की छांव में पलता है
तेरी निश्चल हँसी देखकर
तन मन मेरा खिलता है
अँगुली थामकर मेरी
ठुमक ठुमक कर चलता है
गिरकर उठता है
उठकर सम्भलता है
यह देखकर कई बार यूँहि
दिल मेरा कांप उठता है
चांद से सुंदर इस मुखड़े पर
दो नन्हे नैन सलोने हैं
गुलाबी गुलाबी गालों के बीच
छोटी सी नाक तिकोनी है
इस बाल छवि पर वारी जाऊँ
अपना सब कुछ अर्पण कर पाऊँ
जब तू नजरों से ओझल होता है
मन बदहवास सा हो जाता है
पलभर में ही चौरासी लाख
देवों मन मेरा याद करता है
नजर ना लगे मेरे लाल को
इस बैरी दुनिया की
दोहराता ही रहता है
जब तोतले शब्दों में माँ-माँ कहता
मुख से जैसे शहद टपकता
माँ का मन गद्गद् हो जाता
अपनी हर पीड़ा को भूलकर
तेरे खेल में शामिल हो जाता
आँखों में आंसू ना आयें कभी
ये तेरी माँ का दिल कहता है
तेरे लिये माँ के मन में ममता का
झरना बहता है
सुंदर सपना सलोना है
माँ का राजदुलारा है
तू निर्मल छोटा सा मोती है
इन आँखों की ज्योति है
*****
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
अपने शिशु के लिए माँ के हृदय में जो उदगार उठते हैं या जो ममता का सैलाब उमड़ता है, उसका आपने बहुत सुंदर चित्रण किया है. भाव और भाषा का जो रूप आपकी कविता में है, वह अद्वितीय है. आपको अनेकों धन्यवाद.
कविता पसंद करने के लिये धन्यवाद श्रीमान.