इन आँखों की ज्योति है Poem by Kezia Kezia

इन आँखों की ज्योति है

Rating: 5.0

तुझसे बेहतर ना दौलत है

तुझसे बेहतर ना शोहरत है

तू निर्मल छोटा सा मोती है

इन आँखों की ज्योति है

आँचल की छांव में पलता है

तेरी निश्चल हँसी देखकर

तन मन मेरा खिलता है

अँगुली थामकर मेरी

ठुमक ठुमक कर चलता है

गिरकर उठता है

उठकर सम्भलता है

यह देखकर कई बार यूँहि

दिल मेरा कांप उठता है

चांद से सुंदर इस मुखड़े पर

दो नन्हे नैन सलोने हैं

गुलाबी गुलाबी गालों के बीच

छोटी सी नाक तिकोनी है

इस बाल छवि पर वारी जाऊँ

अपना सब कुछ अर्पण कर पाऊँ

जब तू नजरों से ओझल होता है

मन बदहवास सा हो जाता है

पलभर में ही चौरासी लाख

देवों मन मेरा याद करता है

नजर ना लगे मेरे लाल को

इस बैरी दुनिया की

दोहराता ही रहता है

जब तोतले शब्दों में माँ-माँ कहता

मुख से जैसे शहद टपकता

माँ का मन गद्गद् हो जाता

अपनी हर पीड़ा को भूलकर

तेरे खेल में शामिल हो जाता

आँखों में आंसू ना आयें कभी

ये तेरी माँ का दिल कहता है

तेरे लिये माँ के मन में ममता का

झरना बहता है

सुंदर सपना सलोना है

माँ का राजदुलारा है

तू निर्मल छोटा सा मोती है

इन आँखों की ज्योति है

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COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 16 April 2017

अपने शिशु के लिए माँ के हृदय में जो उदगार उठते हैं या जो ममता का सैलाब उमड़ता है, उसका आपने बहुत सुंदर चित्रण किया है. भाव और भाषा का जो रूप आपकी कविता में है, वह अद्वितीय है. आपको अनेकों धन्यवाद.

1 0 Reply
Kezia Kezia 19 April 2017

कविता पसंद करने के लिये धन्यवाद श्रीमान.

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