लो आज का दिन भी बीत गया
जी लिया एक और
सफा जिंदगी का
कर दिया एक और दिन
इतिहास मे दफन
बीत गया आज का दिन भी
खाते खिलाते पीते पिलाते
सोते जागते गाते नाचते
समेटते बिखेरते ठहाके लगाते
कुछ मुस्कुराहटें ली
कुछ मुस्कुराहटें दी
कुछ उदासी बाँटी कुछ उदासी चाटी
कुछ कल के इंतजार में बीता
कुछ बीते कल के एतबार में बीता
लो बीत गया आज का दिन भी
कुछ सपनों को अपना बना गया
कुछ अपनों को सपना कर गया
कईयों का उधार चुका दिया
कईयों पर उधार चढ़ा दिया
थोड़ा बहुत सीख लिया
बहुत कुछ सीखा दिया
थोड़ा लड़ झगड़ कर
मन हल्का कर लिया
कुछ सबक जिंदगी का
अपनी झोली मे भर लिया
यूँहि कुछ पलों को फुर्सत के
हँसी ठिठोली में गँवा दिया
और कुछ इसी तरह की बेपरवाही में
लो आज का दिन भी बीत गया
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