लो आज का दिन भी बीत गया Poem by Kezia Kezia

लो आज का दिन भी बीत गया

लो आज का दिन भी बीत गया

जी लिया एक और

सफा जिंदगी का

कर दिया एक और दिन

इतिहास मे दफन

बीत गया आज का दिन भी

खाते खिलाते पीते पिलाते

सोते जागते गाते नाचते

समेटते बिखेरते ठहाके लगाते

कुछ मुस्कुराहटें ली

कुछ मुस्कुराहटें दी

कुछ उदासी बाँटी कुछ उदासी चाटी

कुछ कल के इंतजार में बीता

कुछ बीते कल के एतबार में बीता

लो बीत गया आज का दिन भी

कुछ सपनों को अपना बना गया

कुछ अपनों को सपना कर गया

कईयों का उधार चुका दिया

कईयों पर उधार चढ़ा दिया

थोड़ा बहुत सीख लिया

बहुत कुछ सीखा दिया

थोड़ा लड़ झगड़ कर

मन हल्का कर लिया

कुछ सबक जिंदगी का

अपनी झोली मे भर लिया

यूँहि कुछ पलों को फुर्सत के

हँसी ठिठोली में गँवा दिया

और कुछ इसी तरह की बेपरवाही में

लो आज का दिन भी बीत गया

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