बेवजह मैं तुमसे नाराज हो गयी
बेवजह तुम मुझसे खफा हो गये
बेवजह जिंदगी हम पर तोहमत
लगाती चली गई
बेवजह किनारों तक आकर
लहरें मोह्ब्बत की छूटती चली गईं
बेवजह फानी वजहों को तलाशते रह गये
बेवजह जिंदगी के हसीन गुलिस्ताँ को
संजीदगी का सहरा बनाते चले गये
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