इतनी जिंदगी कितनी जिंदगी Poem by Kezia Kezia

इतनी जिंदगी कितनी जिंदगी

इतनी जिंदगी कितनी जिंदगी

जिंदगी संग जी ली उतनी जिंदगी

ए री जिंदगी किसकी जिंदगी

मेरी नही तेरी नही

जिसने जी भर जी ली

उसकी हुई जिंदगी

ऐसी जिंदगी कैसी जिंदगी

जुगनू सी टिमटिमाती जगमग जिंदगी

रेशमी धागों सी उलझी रंग बिरंगी जिंदगी

ए री जिंदगी कहां है जिंदगी

बरबस जिंदगी चंचल जिंदगी

जहां नजर जाए हर पल है जिंदगी

ए री जिंदगी कह री जिंदगी

कब तक रहेगी जिंदादिल जिंदगी

जिंदादिल जिंदगी प्यारी जिंदगी

जब तक हवा और आब हैं

जब तक तुम्हारे कल और आज हैं

सिर पर हौसलों का ताज है

तब तक रहेगी तुम्हारी ये जिंदगी

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Monday, May 8, 2017
Topic(s) of this poem: life,philosophical
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