बात बस इतनी सी थी Poem by Kezia Kezia

बात बस इतनी सी थी

बात बस इतनी सी थी

अपनी अपनी जिदों पर अड़ने

की रवायत थी

तुमने जिद की

मुझे जिताने की

मैंने जिद की थी

तुम्हे जिताने की

इसलिये

मैं तुम्हें जिताने के लिये हारती गई

तुम मुझे जिताने के लिये हारते गये

दोनो अपनी अपनी जिदों पर

आमादा हो हारते गये

वक़्त ने फायदा उठाकर दोनो

को पटक दिया

ना तुम जीत पाये

ना मैं जीत पायी

बात बस इतनी सी थी

अंत में दोनो ही हार गये

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Wednesday, May 10, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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