हृदय में जन्मी, हृदय में बिखरी
हृदय में विकसित, हृदय तक सिमित,
भावनाएं
कभी परिचित कभी अपरिचित
कभी कल्पना की परी कभी सच्चाई से भरी
भावनाएं
कभी दर्द लिए कभी शिकन लिए
कभी खुशियों की उम्मीद लिए
कभी दुखों की फुलझड़ियां लिए
भावनाएं
कभी गगन को छूती
तो कभी सागर को चूमती
कभी श्वेत वर्ण सी कभी इंद्रधनुष बन बिखरी
भावनाएं
कभी चिंता सी कठोर
कभी मुस्कान सी सरल
भावनाएं
कभी आशीर्वाद सी चिरंजीवी
कभी मुख से निकली गालियों सी क्षणिक
अनेकानेक भावनाएं
आहा । कितनी अच्छी भावनाएं
कितनी न्यारी न्यारी भावनाएं
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अनेकानेक प्रकार की भावनाओं का घर है हमारा दिल. जैसे भाव उठते हैं वैसी भावनाएं हिलोरें लेती हैं. इन्हीं श्वेत-श्याम-इंद्रधनुषी भावनाओं का धड़कता चित्र आपने प्रस्तुत किया है. श्रेष्ठ रचना. धन्यवाद, मित्र. कभी गगन को छूती / तो कभी सागर को चूमती कभी श्वेत वर्ण सी कभी इंद्रधनुष बन बिखरी कभी आशीर्वाद सी चिरंजीवी / कभी मुख से निकली गालियों सी क्षणिक
thanks sir for such valuable comment