चलो ये रास्ता दोनों साथ मिलकर पार करते हैं Poem by Kezia Kezia

चलो ये रास्ता दोनों साथ मिलकर पार करते हैं

चलो ये रास्ता दोनों मिलकर पार करते हैं
खुद रूठ कर खुद ही मान जाते हैं
एक दूसरे की चाहतों को जान कर
पूरा करने के लिये दुख सुख दाव पर लगाते है
चलो उस चमकते चांद से
थोड़ी सी चाँदनी उधार माँगते हैं
मुद्दतों बाद मिली फुरसत में
बातें दो चार करते हैं
इस ठंडी गीली रेत पर धीमे धीमे से
पांव के निशान छोड़कर चलते हैं
एक दूसरे का हाथ थामकर
ग़मों को पराया कर चलते हैं
वक़्त की तितलियों को अब
बंद मुट्ठी से आज़ाद कर चलते हैं
खुद ही रूठ कर खुद ही मान जाते हैं
चलो ये रास्ता दोनों साथ मिलकर पार करते हैं
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Sunday, May 21, 2017
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 21 May 2017

रिश्तों को स्थायित्व प्रदान करने की एक सुन्दर कोशिश और उसका प्रगटन. हार्दिक धन्यवाद. मुद्दतों बाद मिली फुरसत में.... बातें दो चार करते हैं चलो ये रास्ता दोनों साथ मिलकर पार करते हैं

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