छम छम करती वर्षा आई Poem by Kezia Kezia

छम छम करती वर्षा आई

Rating: 5.0

छम छम करती वर्षा आई
बूँदों की पायल छनकाई
बादलों की डोली में चढ़कर आई
इंद्रधनुष ने राह सजाई
मोर नाचे पंख फैलाकर
तोता गाये झूम झूम कर
सूखे पेड़ों पर नई कोंपले आई
सूखी धरती की प्यास बुझाई
धरती ने हरियाली की चादर पाई
नदी झरनों में नई ऊर्जा समाई
मेढक झिंगुर ने मीठी तान सुनाई
हर मुरझाई बगिया जान पाई
बिजली गुस्से से गरजाई
सुनकर मैं भी कांपी थर्राई
छम छम करती वर्षा आई
सबके मन में ख़ुशियाँ छाई
****

Sunday, May 21, 2017
Topic(s) of this poem: rain
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 21 May 2017

बहुत सुंदर. यहाँ वर्षाकाल का उत्साह, राहत की अनुभूति, आसमानी बिजली का डर, इस सब का अच्छा वर्णन मिलता है. वर्षा के बारे में कुछ पंक्तियाँ काबिले-गौर हैं: बूँदों की पायल छनकाई बादलों की डोली में चढ़कर आई

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