ओस की एक बूँद Poem by Kezia Kezia

ओस की एक बूँद

गुलाब की पँखुड़ी पर
ओस की एक बूँद आ पड़ी
विस्मय मे आ फँसी
मै कहाँ आ फँसी
फूल ने भाप ली उसकी दुविधा
बोला " तुम पँखुड़ी से लुदक कर
मेरे भीतर समा जाओ
मैं तुम्हे मधुर मधु मे बदल दूँगा"
अन्यथा तुम धरा पर गिर
कीचड़ मे बदल जाओगी

बूंद घबराई
सही गलत वो समझ ना पायी
मैं भीतर समा जाऊँ
सूरज तब तक चढ़ आया था
विस्मय घोर मन मे छाया था
वाष्प में बदलने ही वाली थी
तुरंत फूल की गोद में समा गयी
और देखते ही देखते
मधुर मधु में बदल गई
फूल के स्नेह अब वो समझ गई
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