उस माटी में कण जुड़े हुए थे
गिरती बूँदों को अपनी गोद में पालती थी
जड़ों से जुड़कर रहती थी
किरर्किराहट का नाम भी नही था
हर एक घटक को मजबूती से
जकड़ कर रखे हुए थी
वो माटी बड़ी उपजाऊ थी
वो रेत कण कण होकर उड़ता था
किसी बूंद को पनाह देना उसकी
शान के खिलाफ था
जुड़ कर रहना उसे आता नही था
किरकिराहट बन आँखों में जाता था
वो रेत सूखा बंजर था
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