गीत सुंदर  सलोने गाये Poem by Kezia Kezia

गीत सुंदर  सलोने गाये

यौवन उपवन बनकर हृद्य में
गीत सुंदर सलोने गाये
मनभावन की राह में निसदिन
बैठा रहे ये नैन बिछाये
चंदा से संदेसा भिजवाये
तारों से बतियाता जाये
कब किसकी सुनता है
अपनी धुन में गाता जाये
झरना ये तूफानों का
यूँ ही बहता जाये
राह देखकर क्योंकर बैठे
चकोरी को बिन देखे मन मरता जाये
मन भर विचारों का बवंडर छलता जाये
सच्चे झूठे सपनो के
सुंदर महल बनाता जाए
विरह में फँसकर उन महलों को
गिराता जाये
हृद्य वेदना आँखों में भरकर
प्रीत की रीत निभाता जाये
अश्रु क्यों छुप-छुप कर बहाये
यौवन उपवन बनकर हृद्य में
गीत सुंदर  सलोने गाये
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Saturday, June 10, 2017
Topic(s) of this poem: love
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