ये मंज़र चाँद और तारों का Poem by Ahatisham Alam

ये मंज़र चाँद और तारों का

Rating: 4.0

ये मंज़र चाँद और तारों का
ये रौशन रौशन नज़ारों का
मुझे तेरी याद दिलाता है
मेरे दिल को तड़पाता है।

मेरे हमसफर मेरे साथ चल
कैसे गुज़रेंगे ये तनहा पल
क्यों इश्क में सबकुछ मिटा दिया
क्यों चैनो सुकून को लूटा दिया

तेरी याद में हूँ मैं बेक़रार
तेरी चाह में सब गया हूँ हार
क्यों सूरज जलवा दिखा दिखा
इस आलम को जलाता है।
मुझे तेरी याद दिलाता है
मेरे दिल को क्यों तड़पाता है।

Thursday, June 29, 2017
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success