हम पर वो जान देते थे Poem by Ahatisham Alam

हम पर वो जान देते थे

हम पर वो जान देते थे
मगर हम कभी भी न ध्यान देते थे

आँख खुली तो शायद बहुत देर हो चुकी थी
मेरी किस्मत से शायद वो मोहब्बत खो चुकी थी

बस यही है तक़दीर जो अपनो को जुदा कर देती है
ग़ैरों के लिये दिल में वफ़ा भर देती है।

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May2000
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