चाँद की रौशनी Poem by Ahatisham Alam

चाँद की रौशनी

चाँद की रौशनी है सारे आसमाँ पर
कहते हैं लोग की दाग़ है चाँद में मगर
जब आसमाँ की तरफ हमने उठायी नज़र
तो पाया कि वो मौजूद है, मगर सिर्फ चाँद पर।

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२०.१२.२०००
(०३: ३० प्रातः)
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