हमको क्या करना है शासन से
हमतो केवल आपसी प्यार चाहते हैं।
राजनीति के घिनौने दांव पेंचों से क्या
हमतो केवल आपसी प्यार चाहते हैं।
शिक्षा और समृद्धि तो हो ही
मगर लोगों में गाँधी सुभाष के विचार चाहते हैं।
अहित ना होने पाये किसी का
तभी तो हम सब एक स्थिर सरकार चाहते हैं।
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देश के हर नागरिक की यही इच्छा रहती है. बहुत सुंदर कहा है आपने.