यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते Poem by Ahatisham Alam

यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते

तो देश का ये हाल न होता
झूठ और फरेब का ऐसा जाल न होता
होती न ग़रीबी और भुखमरी
ज़िन्दगी जीते लोग सुख भरी
सामने विदेशियों के हम यूँ ना रोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

सुख शांति से भरा ये देश होता
आपसी प्रेम होता न की राग द्वेष होता
खुशियों भरा ज़माना होता
उद्देश्य उचाईयों को पाना होता
हम भी एक उन्नत भारत के सपने संजोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

ऊँच-नीच और जाति-पात की भावना न होती
लोगों को कष्ट देकर सफलता की कामना न होती
भारत पाक का न होता विवाद
प्रेम सद्भावना का पाठ सबको होता याद
इस देश के नवयुवक आज यूँ ना सोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

स्वतंत्र होकर भी ये देश न ग़ुलाम होता
शिखर देशों में इसका भी नाम होता
अंतर्कलह से न होते गृहयुद्ध
सदाचार होता होते विचार शुद्ध
पाकर भी स्वतंत्रता को हम यूँ न खोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

आज इस तरह की राजनीति न होती
बुराईयों से लोगों को प्रीत न होती
होता हर व्यक्ति विकाश की नांव में
जीवन कटता सबका मंज़िल की छाँव में
लोग अभद्रता नही बल्कि सदाचार बोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

समाज में भय और अशांति न होती
पतन मार्ग पर अग्रसर क्रांति न होती
अपराध और अराजकता का नाम न होता
राष्ट्र विकास का पहिया ऐसे जाम ना होता
आज आँखों को अपनी हम आंसुओं से न भिगोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।

नाम साम्प्रदायिकता का लोगों को याद न होता
धर्म जाति के नाम पर विवाद न होता
हर भारतीय का आपस में मेल होता
सर्वनाश का ऐसा न खेल होता
चरण उनके धोकर लोग पापों को धोते
यदि सुभाष होते, यदि सुभाष होते।।

Wednesday, July 5, 2017
Topic(s) of this poem: patriotism
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from 'JAI SUBHAASH'
Year 1997 to 1999
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