जो मुसाफिर नही मेरी राह का Poem by Ahatisham Alam

जो मुसाफिर नही मेरी राह का

जो मुसाफिर नही है मेरी राह का
उसका हमेशा इंतज़ार रहेगा
तुम साथ दो या ना दो
ज़िन्दगी रहेगी तो तुमसे प्यार रहेगा

तुम रूह हो तो जिस्म हूँ मैं
तुम सांस हो तो रूह हूँ मैं
तुम हो तो खुशियां हैं
तुम हो तो ग़म है
तुम हो तो सबकुछ है
तुम हो तो ये आलम है।

Sunday, September 3, 2017
Topic(s) of this poem: love
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
AS
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success