अत्याचार Poem by vijay gupta

अत्याचार

"अत्याचार"

हमें मनोरंजन का अधिकार तो है,
पर क्रूरता का हक नहीं,
निरीह जानवरों को लड़ाना, खून बहाना,
इंसानियत नहीं हैवानियत है।

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vijay gupta

vijay gupta

meerut, india
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