खता क्या है? Poem by Lalit Kaira

खता क्या है?

कोई मुझे बता दे खता क्या है
आखिर मैंने ऐसा कहा क्या है

मुस्कुराहटें मजबूरी हो जहाँ
ऐसे जीने में मजा क्या है

तेरा बोसा मरने नहीं देता
हो कहते तुझे पता क्या है

भोले हैं बड़े वो पूछ बैठे
पास फ़कीर के जमा क्या है

हमने लुटा दी थी दुनियाँ
जानते नहीं थे अदा क्या है

मेरी लड़ाई मेरी अपनी है
तेरी ओर देखना क्या है

Monday, December 25, 2017
Topic(s) of this poem: pain
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Lalit Kaira

Lalit Kaira

Binta, India
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