मजबूरी Poem by vijay gupta

मजबूरी

"मजबूरी"

रात के वक्त बच्चा जिद करता है,
हमें जिद पूरी न कर पाने का मलाल,
यही तो है असल जिंदगी,
हम चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाते।

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vijay gupta

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meerut, india
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