एक थी लड़की बड़ी अनजानी,
जिसकी सुनाने जा रहा हूँ मै तुम्हे कहानी,
जब हुई वो थोड़ी बड़ी,
अम्मा छोड़ उसे चल बसी,
पिता ने पाला उसे,
खूब माना उसे,
पर माँ का प्यार तो कुछ और ही होता है,
उसके बिना जीवन नर्क बराबर होता है,
माँ का प्यार उसे न मिला,
जीवन उसका न खिला,
पिता ने पाला उसे,
जीना जीवन सिखलाया उसे,
कभी न होने दिया उसे कष्ट,
कभी होने न दिया उसकी बुद्धि को भ्र्ष्ट,
पर कुछ दिन बाद पिता का प्यार उसे नसीब न हुआ,
मिल जाये उसे उसकी माँ मांगती थी वो रब से अब यही दुआ,
कहने से वो अपने कष्ट को डरती थी,
तनहा अकेली जीती थी,
खाने पीने के लिए तरसती थी,
समाज की दुत्कार समझती थी,
पर किसी को कुछ न कहती थी,
क्योंकि कहने पर उसे फिर डाँट ही मिलती थी,
बेचारी किस्मत की मारी,
समाज से हारी,
कष्ट सहती रही,
किसे कुछ न कहती रही,
एक दिन हुआ कुछ ऐसा,
उसने सोचा न था कभी वैसा,
हुआ था बस यूँ
सुना रहा हूँ तुम्हे ज्यूँ का त्युं,
मांगने गयी वो खाना अपनी मामी से,
सुन गयी वो गाली उन से,
गाली का मतलब उसने समझा,
टूट गया आगे बढ़ने का जज़्बा,
हार गयी वो अपने जीवन से,
तय किया की करुँगी मैं अब प्रेम मरण से,
तभी उसका जीवन बदला,
लगा उसे हर कुछ बदला,
हुई उसकी शादी एक जगह पर,
घर पहुंची वो उनकी बहु बन कर सही समय पर,
उसे लगा अब बदलेगा उस का जीवन,
नहीं करना होगा उसे मरने का प्रण,
पर हुए उसके सरे सपने चूर,
तिररस्कार हुआ उसका भरपूर,
जीवन उसका नरक बन गया,
सब कुछ उसके लिए धुंधला बन गया,
तभी हुआ कुछ वैसा,
सोची थी वो जैसा,
उसके हुए बच्चे अनेक,
लगा उसे आएगा उसके जीवन में अब आवेग,
पर उस के लिए यह भी न मुमकिन हो सका,
किस्मत को उसे अपनी कोसना पड़ा,
चूल्हे चक्की में जब थी वो मगन,
तब आया उसे परमात्मा का ध्यान,
उसे पूजा अर्चना शुरू की,
उनके ध्यान में मगन थी,
तभी उसे अपनी ज़िन्दगी फिर कोसना पड़ा,
उसका कोई एक इस दुनिया में न रहा,
अब उसकी स्थिति और बिगड़ी,
जीवन की जंजीर उसे बहुत कस के जकड़ी,
उसका बड़ा बेटा गया पढ़ने दूर,
इस उम्मीद में की वो कुछ बन के आएगा जरूर,
इस बीच समय गुजरता रहा,
तन्हाई उसे घेरता रहा,
फिर हुई उसकी पूजा पूरी,
उसकी और घर की दशा हुईं सुधरनी,
अब उसके जीवन में रंग आया वापस,
वो खरीद पायी अपने बच्चों के लिए कलम कागज,
इस बीच उसका बड़ा बेटा आ गया,
उसके जीवन में रंग फिर छा गया,
तभी बड़े बेटे की शादी हुई,
उसे कोई नयी मिली,
अब बहु करती थी सारा काम,
कभी कभी वो करती थी आराम,
फिर उसे एक पोता हुआ,
हुआ वो पैदा रोता हुआ,
जब पोत उससे मिला,
तब उसका घाव कुछ कम जला,
फिर एक के बाद दूसरे के शादी हुई,
उसे एक बेटा और बेटी हुई,
तब तक घर के हालात और सुधरे,
जले पे नमक उसे अब कम होने लगे,
अब तीसरे की शादी हुई,
उसे भी एक बेटी हुई,
तब तक उसका पोता कुछ बड़ा हुआ,
चीजों को साझा करना शुरू किया,
जब वह कुछ हुआ बड़ा,
तब जा के उसका कष्ट ख़त्म हुआ,
जीवन अब उसने जीना शुरू किया,
भूत (past)को भूलना शुरू किया,
पर यह उससे हो न सका,
पर जीवन को अब उसने मना,
सुख मिला अब उसे कहीं जा के,
नहीं तो जिंदगी में दुःख ही थे उसके,
अंत में उसके छोटी बेटे की भी शादी हुई
पत्नी खूबसूरत उसे मिली,
जब वे अपने नए बेटे से मिली,
तब वह जीवन को वो समझने लगी,
हुई वो तब जा के खुशहाल,
जब ज़िन्दगी में आई उसके नयी बहार,
हुई छोटे बेटे की भी एक बेटी,
उसकी सबसे छोटी पोती,
अब वो जीवन का आनंद ले रही है,
ज़िन्दगी और भूत को नहीं कोस रही है,
पर जब भी आती है उसे याद बीते बात,
रो उठते हैं उसके जज्बात,
यही थी उसकी कहानी,
मैंने लिखी उसकी जुबानी|
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A good start with a nice poem, H. S. You may like to read my poem, Love And Lust. Thank you.