"बूढे माँ बाप और वो एक कपूत"
सड़क पे छोड़ कर "बूढे माँ बाप" को,
देखो, तुमने कितना महान काम किया है।।
जिस माँ ने तुम्हें पैदा किया,
उसकी गोद को तुमने ही तार - तार किया ।।
याद कर उस दिन को जब इस माँ ने तुझे अपने सीने से लगाया था,
और अपना प्यारा बच्चा बताया था।।
तेरी आँखों मे काजल लगाकर,
तुझे भी कितना सुन्दर बनाया था।।
और पिताजी की बात ही निराली है,
अपनी खाली जेब होते हुए भी,
अपने आप को राजा बताते थे,
और अपने आप को बेच कर भी,
तुम्हारे लिये भी ढेर सारे खिलौने जो लाते थे।।
माना तुम अब बड़े हो गये हों,
शायद माँ बाप से भी ऊपर हो गये हों।।
देखों तुमने उनकी मोहब्बत का क्या सिला दिया,
उनको उनके ही "घर" से "बेघर" कर दिया।।
वो "घर" जो कभी उनका "एक मंदिर" हुआ करता था,
अरे, अब ये "घर" कहा रहा? ? यह तो एक "मकान" हो गया।।
क्युकि "घर" मे तो "ईश्वर" रहते हैं,
और तुमने तो "ईश्वर" को ही उनके ही घर से बेघर कर दिया।।
शायद इसलिये अब यह "घर" एक "मकान" हो गया,
लो अब यह "मकान" तुम्हारे नाम हो गया।।
देखों तुम्हारा कितना नाम हो गया...! ! !
चिंता मत करो वक़्त का पहिया फिर चलेगा,
जब इतिहास, भविष्य के मुँह पर अपने कदम रखेगा।।
फिर वो भी यहीं बात दोहराएगा,
जब तुम्हारा ही बच्चा, तुम्हें भी इस तरह तुम्हारे "मकान" से निकाल बाहर करेगा ।।
तब तुम्हें समझ मे आयेगा,
कि तुमने क्या कर डाला,
अपने बूढे माँ बाप को क्यों "बेघर" कर डाला? ? फिर तुम्हारी आँखों मे आँसू होगे,
पर इसे पोछने वाला कोई नहीं होगा।।
यह तो बूढे माँ बाप का सौभाग्य हैं कि वो एक साथ हैं,
और तुम्हारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य हैं कि अब तुम होअकेले, बिल्कुल अकेले ।।
अब चाहा कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हो,
बस सूनी सड़कों पर तमाशा बनते जा रहे हो।।
और बेबस आँखों से अपने पुराने इतिहास को देखते जा रहे हो....
एक कहावत: - " ‘जैसा बोओगे, वैसा पाओगे'"
एक छोटा सा ज़ज्बात मेरी नन्ही कलम से -
(शरद भाटिया)
Bahut sundar rachna. Society me ye ab aam baat ho gaye hai aur hum long apne boodhe maa baap ko old age home bhej rahe hain.
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Aapka naya kavita nahi khul raha.