ग़मे दुनियाँ ने मुझको लूटा Poem by Ahatisham Alam

ग़मे दुनियाँ ने मुझको लूटा

ग़मे दुनियाँ ने मुझको लूटा
और कहीं का ना छोड़ा
जहाँ में देखो सभी ने है
मुझसे अपना नाता भी तोड़ा।

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