सोचा नहीं Poem by Ahatisham Alam

सोचा नहीं

अब मेरा क्या होगा
सोचा नहीं।
हो सकता है ये इश्क़ बर्बाद कर दे
हो सकता है कल ये तड़प ही न रहे
तुम आज ना समझ हो
कल क्या होगा
सोचा नहीं।

Tuesday, December 25, 2018
Topic(s) of this poem: love
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
As
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success