कितना अच्छा होता Poem by Vivek Tiwari

कितना अच्छा होता



कितना अच्छा होता गर हर कोई इंसान होता!
न कोई हिन्दू, न कोई मुसलमान होता।
न जातिगत भेद, न धर्मगत फरमान होता,
कितना अच्छा होता गर हर कोई इंसान होता!

हर दिल में रहमत और लफ्ज़ो में दुआ होती
हर दिल में हर धड़कन का सम्मान होता,
हर कोई हर किसी से प्यार करता
न कही नफ़रत का नामोनिशान होता ।

कितना अच्छा होता गर हर कोई इंसान होता!
कितना अच्छा होता गर हर कोई इंसान होता!

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Vivek Tiwari

Vivek Tiwari

Gaura (R.S.) Pratapgarh
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