कल मेरे लिये तुम पछताओगे Poem by Ahatisham Alam

कल मेरे लिये तुम पछताओगे

कल मेरे लिये तुम पछताओगे
बहुत तड़पोगे पर पास ना आ पाओगे
महल ख्वाबों का ये खोना होगा
मुझको सोचोगे तो रोना होगा।

Thursday, January 3, 2019
Topic(s) of this poem: love
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