कल तक वो कहते थे कि ज़िन्दगी
कुछ भी नहीं है तुम्हारे बिना
और आज वो ये कहते हैं कि
तुम कुछ भी नहीं हो
हम ख़ुद न समझ पाये
कि क्या सोचें हम
कभी लगता है कि तुम ग़लत हो
कभी लगता है सही हो।
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