एक बार मोहब्बत मुझे भी हुई थी Poem by Ahatisham Alam

एक बार मोहब्बत मुझे भी हुई थी

एक बार मोहब्बत मुझे भी हुई थी
फिर उसके बाद उन यादों को मिटाया ना जा सका
लोग बहुत मिले इज़हारे मोहब्बत करने वाले
उनकी जगह पर किसी को भी लाया ना जा सका।

Thursday, January 3, 2019
Topic(s) of this poem: love
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