बेरंग बहुत ये आलम है। Poem by Ahatisham Alam

बेरंग बहुत ये आलम है।

महफ़िल में जो मिट जाये
वो ग़म भी भला कैसा ग़म है
तेरे बिन मैं कुछ भी नहीं
बेरंग बहुत ये आलम है
कोई आके तमाशा देखे
अब मेरे हाले दिल का
हर सुब्ह यहाँ एक उलझन है
हर शाम सजा एक मातम है
तेरे बिन मैं कुछ भी नहीं
बेरंग बहुत ये आलम है।

Friday, January 4, 2019
Topic(s) of this poem: love
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