फाग Poem by vijay gupta

फाग

फाग

ये फाग का महीना,
ये फाग की मस्ती,
ये रंगीन मौसम,
फूलों का बहार,
कलियों पर औस की बूंदे,
मचलते भौरों की भरमार,
मंडराना तितलियों का,
छोटे-छोटे बच्चों का उल्लास,
हवा में उड़ता आंचल,
ये अलसाई-अलसाई पलके,
ये फाग का महीना,
ये फाग की मस्ती।
अभी कुछ वक्त है,
उड़ेगी अबीर-गुलाल की आंधी,
लिखी जाएगी नई इबारत,
गिले-शिकवे होंगे फानी।
ये मौसम ही ऐसा है,
अरमान परवान चढ़ते हैं।
खिलती है सरसों,
फूलती है गेहूं की बालियां,
झूमते हैं जवान,
मुस्कुराते हैं बूढ़े,
फसल नई आएगी,
झोली खुशियों से भरेगी,
पर ये क्या दूर से आता रामखिलावन,
मुझे बुझा-बुझा सा दिखा,
उसे लड़की की ससुराल में,
फगवा जो भेजना है।

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