स्वाभिमान से शून्य तक, उन्माद से शांति तक
मिथ्या ओर सत्य का भेद जानकर, निजता से जन-कल्याण तक
मृत्यु को ही सत्य मानकर, व्यर्थ की चर्चा से आत्मचिंतन तक
सम्मान का मोह ओर अपमान का डर छोड़कर, मूर्ति पूजा से ध्यान तक
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