शिरडी साईं बाबा...! Poem by Vidya Pandarinath

शिरडी साईं बाबा...!

शिरडी साईं बाबा...मेरे बाबा साईं
मेरे भगवन ना तुमसा कोई....!
तुम्हारे नज़र में सब एक सामान
ऊंच नीच, जात-पात, आमिर गरीब न कोई

तुम्हारे दर्शन करने से सब
आकांक्षा पूरी हो जाये

तुम्हारे पूजा करने से सब
कष्ट और तनाव दूरी हो जाये

तुम्हारे ध्यान करने से सब
के..जीवन की हर अभिलाषा पूरी हो जाये

तुम्हारे चरण स्पर्श करने से सब
के...जिंदगी पावन हो जाये

तुम्हारे मंदिर को जाने से सब
.के..मन शांत हो जाये

तुम्हारे सिद्धान्तों पर चलने से सब
के...जनम संतुष्टि हो जाये

तुम्हारे सूरत देखने से सब
तरह के...अनिश्चितता दूर हो जाये

तुम्हारे आशीर्वाद से सब
भी...कठिनाई दूर हो जाये

तुम्हारे मार्ग पर चलने से सब
के...जीवनकाल संतुष्टि हो जाये

तुम्हारे नाम लेने से सब
के..जनम संतुष्टि हो जाये

तुम्हारे याद करने से सब
तरह के..आशंका दूर हो जाये

तुम्हारे भक्ति में लीन होना से सब
मुश्किल आसान हो जाये

शिरडी साईं बाबा...मेरे बाबा साईं
मेरे भगवन ना तुमसा कोई....!
हमेशा मेरे साईं बाबा...मेरे पास होते हैं
दिल उदास नहीं बहुत खुशनसीब होता हैं।

शिरडी साईं बाबा...मेरे बाबा साईं
मेरे भगवन ना तुमसा कोई....!
हमेशा मेरे साईं बाबा..मेरे साथ होते हैं
कठिन समय तेरी कृपा से सुगम होता हैं।

शिरडी साईं बाबा...मेरे बाबा साईं
मेरे भगवन ना तुमसा कोई....!
हमेशा मेरे साईं बाबा..मेरे यक़ीन में होते हैं
हर नामुमकिन हालत मुमकिन होता है।

शिरडी साईं बाबा...मेरे बाबा साईं
मेरे भगवन ना तुमसा कोई....!
हमेशा मेरे साईं बाबा..मेरे हृदय में होते है
नफ़रत नही सब के लिए प्रेम होता है ।

शिरडी साईं बाबा...!
Tuesday, June 7, 2022
Topic(s) of this poem: god
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